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सीईटीपी चेयरमैन की सार्थक पहल : डंपिंग यार्ड में लगाएंगे चार हजार से अधिक पौधे, तीन साल पहले जहां दिन भर जलता था कचरा, अब वहां आएगी हरियाली

भिवाड़ी। औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी के रामपुर मुंडाना डंपिंग यार्ड में तीन साल पहले तक दिनभर कचरे में आग लगी रहती थी, जिससे आसपास के इलाकों में रहने वालों का जीवन दुश्वार हो गया था लेकिन अब यहां की तस्वीर बदलने वाली है। डंपिंग यार्ड में कचरे में आग लगने पर पूरी तरह रोक लग गई है और यहां पर जमीन को समतल कर हरा-भरा बनाने की पहल की गई है। डंपिंग यार्ड का प्रबंधन संभालने वाले कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट ( सीईटीपी) के चेयरमैन सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए मिलकर प्रयास किया जा रहा है। शुरुआत में डंपिंग यार्ड के गेट व एमआरएफ सेंटर के पास नीम, बांस, पीपल सहित अन्य प्रजाति के सौ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। जल्द ही पर्यावरण संरक्षण के लिए डंपिंग यार्ड में पार्क बनाया जाएगा। इसके लिए ज़मीन समतल की जा रही है औऱ बाहर से मिट्टी लाकर डाली जाएगी। पार्क व डंपिंग यार्ड के चारों तरफ चार से पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसकी देखरेख व खाद-पानी देने के लिए कर्मचारी लगाए जाएंगे, जिससे पौधों को जल्दी बढ़ने में मदद मिल सकेगी। सीईटीपी चेयरमैन सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थित डंपिंग यार्ड में पार्क विकसित होने से ना सिर्फ आसपास के लोगों को स्वच्छ व ताज़ी हवा मिल सकेगी बल्कि वायु प्रदूषण की रोकथाम में भी मदद मिलेगी।

एमआरएफ सेंटर में होगा कचरे का निस्तारण

 रीको डंपिंग यार्ड के चारों तरफ दीवार ऊंची करवाकर घरेलू कचरे को डालने पर रोक लगा दिया गया है। अब यहां पर सिर्फ औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे को लाया जा रहा है। इस कचरे को अलग-अलग कर बायो प्रॉडक्ट बनाने के लिए मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाया गया है और डेढ़ करोड़ की लागत से तीन-चार मशीनें मंगवाई जा रही हैं, जिससे कचरे को अलग करके विभिन्न उत्पाद बनाया जाएगा। फिलहाल यहां प्रतिमाह तीन सौ से अधिक ट्रैक्टर कचरा आ रहा है, लेकिन जागरुकता बढ़ने से इसकी संख्या में बढोत्तरी होगी। इससे ना सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र में कचरे का निस्तारण होगा बल्कि कई लोगों को रोजगार मिलेगा।
– डंपिंग यार्ड में हरियाली के लिए पार्क विकसित किया जाएगा तथा चारों तरफ चार से पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे। इससे ना सिर्फ हरियाली विकसित होगी बल्कि वायु प्रदूषण की रोकथाम में मदद मिलेगी। डंपिंग यार्ड में सौ से अधिक पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की गई है। इसके अलावा कचरे के निस्तारण के लिए डेढ़ करोड़ की लागत से मशीनें मंगवाई जा रही हैं और जल्द ही यह मशीनें आने के बाद कचरे को अलग करके निस्तारण किया जाएगा।
– सुरेंद्र सिंह चौहान, चेयरमैन, सीईटीपी भिवाड़ी।

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