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सरकारी विज्ञापनों के सामग्री विनियमन के लिए गठित राज्य स्तरीय समिति की प्रथम बैठक, उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश

NCR Times News Network Jaipur.
 उच्चतम न्यायालय ( Suprime Court) द्वारा सरकारी राशि से प्रकाशित व प्रसारित विज्ञापनों के सामग्री विनियमन हेतु पारित निर्णयों की अनुपालना में गठित राज्य स्तरीय विज्ञापन नियमन समिति की प्रथम बैठक राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को सूचना एवं जनसम्पर्क मुख्यालय, जयपुर में आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य एन. एल. मीणा, पूर्व आयुक्त, सूजस तथा सीनियर जर्नलिस्ट अजय ढ़ड्ढा भी उपस्थित थे।
बैठक में समिति द्वारा सरकारी राशि से प्रकाशित एवं प्रसारित विज्ञापनों के संबंध में  उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से आमजन को अधिक से अधिक जागरूक किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इस संबंध में समिति द्वारा प्रिन्ट, इलैक्ट्रोनिक एवं डिजिटल मीडिया के माध्यम से इन दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराये जाने का निर्णय लिया गया। इन दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के मामलों की शिकायत सदस्य सचिव, राज्य विज्ञापन नियमन समिति, सूचना एवं जनसम्पर्क मुख्यालय, जयपुर को डाक अथवा ई-मेल द्वारा की जा सकेगी।
समिति के क्षेत्राधिकार में राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित समस्त विज्ञापन, जिनमें सभी  शासकीय विभाग, स्थानीय निकाय/स्वायतशाषी संस्थान/परिषद/निगम द्वारा जारी विज्ञापन के साथ-साथ, राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्थानों द्वारा जारी विज्ञापन सम्मिलित होंगे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थानीय स्तर पर भी सरकारी राशि से प्रकाशित एवं प्रसारित विज्ञापनों में दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के मामलों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग जिला सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालयों द्वारा कराई जायेगी तथा उल्लंघन के मामलों की रिपोर्ट मुख्यालय को प्रेषित की जायेगी। उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर दिशा-निर्देशों का प्रदर्शन (डिस्पले) किया जाएगा। समिति द्वारा प्रत्येक माह के दूसरे सोमवार को समिति की बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।
प्रारम्भ में सदस्य सचिव अलका सक्सेना ने राजस्थान विज्ञापन विनियमन समिति के सदस्यों का स्वागत किया गया तथा समिति के गठन की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। समिति में संयुक्त निदेशक, विज्ञापन शिवचन्द मीणा व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा राजकीय राशि से प्रकाशित एवं प्रसारित विज्ञापनों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये गये। इसके अनुसार विज्ञापन सामग्री वस्तुनिष्ठ व निष्पक्ष होनी चाहिए। विज्ञापन में राजनीतिक दल का नाम, दल की वेबसाईट का लिंक अंकित नहीं होगा। प्रत्यक्ष रूप से विचार एवं क्रियाकलाप द्वारा विपक्ष को आक्षेपित नहीं किया जाएगा। राजनीतिक दल के चिन्ह, लोगो और झण्डे का उपयोग नहीं किया जा सकता तथा राजनीतिक दल द्वारा चुनाव में प्रतिनिधि को जनसहयोग देने के लिए प्रभुत्व का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही राजकीय विज्ञापन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और राज्यपाल, मुख्यमंत्री के फोटो उपयोग में लिए जा सकेंगे। यदि आवश्यक हो तो प्रधानमंत्री के स्थान पर विभाग के कैबिनेट मंत्री अथवा प्रभारी मंत्री के फोटो प्रकाशित किये जा सकेंगे। इसी प्रकार मुख्यमंत्री के स्थान पर विभाग के कैबिनेट मंत्री अथवा प्रभारी मंत्री के फोटो प्रकाशित किये जा सकेंगे।
इन दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित किये जाने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकारों को विज्ञापन सामग्री नियमन समिति का गठन करने के निर्देश दिये गये है।

 

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