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गुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफे पर बोले गहलोत, ‘ सदमें में हूं, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी’

NCR Tines, Online Desk. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफा देने पर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने जमकर निशाना साधा है। गहलोत ने कहा कि ग़ुलाम नबी आजाद संजय गांधी के चापलूस रहे हैं। कांग्रेस पार्टी व सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे आजाद ने जो टिप्पणियां की हैं, वो उचित नहीं है। गहलोत ने कहा कि वह खुद सदमे में हैं कि एक 42 साल का व्यक्ति जिसे जिंदगी में सब कुछ मिला हो वो आज ऐसे संदेश दे रहें, जो मेरे समझ के परे हैं।

सोनिया गांधी की बीमारी के वक़्त पत्र लिखकर क्या संदेश देना चाहते हैं आजाद

– देखिए संजय गांधी जब थे, तो वो भी कइयों की बात नहीं मानते थे, उन्हीं के प्रोडक्ट हैं गुलाम नबी आजाद भी और अन्य नेता भी, उस जमाने के अंदर जब दौर आया था, उस वक्त में संजय गांधी ने यूथ कांग्रेस में उसके माध्यम से राजनीति शुरू की देश के अंदर, कई आरोप लगे थे, एक्स्ट्रा कॉन्स्टीट्यूशनल अथॉरिटी बन गई है संजय गांधी बन गए हैं, ये आरोप लगे थे, इंदिरा जी पर लगे थे, ठीक है, उस वक्त के जो प्रोडक्ट हैं आज जो देख रहे हैं आप देश के अंदर, युवाओं को जो मैं बार-बार कहता हूं कि मुख्यमंत्री, पीसीसी प्रेसिडेंट, केंद्रीय मंत्री, एआईसीसी के महामंत्री 90 पर्सेंट वो बने हैं जो संजय गांधी के वक्त में संघर्ष करते थे, सड़कों पर आए थे, इंदिरा गांधी जी खुद चुनाव हार गई थीं, सरकार चली गई हमारी। आज जब आंदोलन होते हैं दिल्ली में, तो मुझे वो दिन याद आते हैं कि संजय गांधी के वक्त में भी ऐसे आंदोलन हुआ करते थे, उसी के प्रोडक्ट गुलाम नबी आजाद साहब भी हैं, उसी के प्रोडक्ट और कई नेता भी हैं।

 संजय गांधी के फैसलों का विरोध करते थे गहलोत

तो हर जो नेता आएगा, आगे आएगा, वो अपने हिसाब से जाजम बिछाता है राजनीति करने की, उस वक्त संजय गांधी जब राजनीति कर रहे थे, फैसले कर रहे थे, कइयों को पसंद नहीं आते थे, उसमें से एक मैं भी था, उसमें मैं भी था, ठीक है, तब भी मुझे चांस मिल गया बाय द वे, ठीक है। तो मैं उनके फैसलों को लाइक नहीं करता था मैं, मैं खुद लाइक नहीं करता था, तब भी मुझे चांस मिला, मैं काम करता गया एनएसयूआई के अंदर, फिर जिला कांग्रेस अध्यक्ष बना राजस्थान में जोधपुर जिले का, फिर मैं एमपी बन गया, एक लंबी कहानी है। तो गुलाम नबी आजाद साहब टोटली संजय गांधी जी के बहुत करीब रहे हैं और जो मैं बार-बार कहता हूं कि उस वक्त में भी कई लोग देश के नौजवान मेरी तरह संजय गांधी के साथ नहीं थे, उनके विचारों का मेल नहीं खाते थे, हम खिलाफ थे उनके, ठीक है, ये चलता रहता है राजनीति के अंदर। आज राहुल गांधी आए हैं, राहुल गांधी जी अपने हिसाब से कि किस प्रकार मैं कांग्रेस को आगे ले जाऊं, उनकी अपनी सोच होगी, अगर हमने 40 साल तक संजय गांधी के साथ रहकर काम की शुरुआत की, अनफॉर्चूनेटली वो हमारे बीच नहीं रहे, वो भी एक बहुत ही उभरते हुए नेता थे, कई लोग आज भी उनको याद करते हैं, उनके कामों को याद करते हैं, उनके फैसलों को याद करते हैं, उस वक्त की जो टीम थी, 40 साल तक हमने शासन किया, उसमें आजाद साहब भी थे। आजाद साहब का जो मैंने स्टेटमेंट पढ़ा है, मेरे तो मित्र रहे हैं वो, हम लोग 40-42 साल से साथ में हैं, मुझे बहुत आघात लगा है, मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता कि किन शब्दों में मैं उनके आज के पत्र को मैं किस रूप में कमेंट करूं क्योंकि 42 सालों का साथ था हम लोगों का 42 साल का साथ और उनको पार्टी ने मौका दिया, चाहे वो इंदिरा थीं।

आज़ाद की शादी में कश्मीर गए थे इंदिरा व संजय गांधी

इंदिरा गांधी और संजय गांधी गुलाम नबी आजाद की शादी में  श्रीनगर गए थे।  उस वक्त से ही लगाकर आज 42 साल तक इनको सब पदों पर, चाहे वो पहले महाराष्ट्र से आए हों एमपी बनकर तो वहां से बनाया इनको 2 बार, राज्यसभा में आए हों 5-6 बार, तो वहां उनको मौका मिला है, अवसर देने में कांग्रेस ने कमी नहीं रखी, हाईकमान ने भी और कांग्रेस ने। आज जो कुछ भी पहचान हमारी देश के अंदर है, 135 करोड़ की आबादी है, कौन किसको जानता है? आज हम लोग जो भी हैं, कांग्रेस और हाईकमान के विश्वास के कारण है हमारी पहचान, कितने लोगों को चांस मिलता है, सबको मिल भी नहीं सकता है, कुछ लोगों को चंद लोगों को चांस मिलता है, तो हाईकमान के सामने कितना बड़ा चैलेंज होता है सलेक्ट करने का कि मैं किनको सलेक्ट करूं? बाकी लोग क्या सोचेंगे? इस प्रकार से जो आज हम लोग 50-60-100 जो भी होंगे उसमें आजाद साहब भी शामिल हैं, उस रूप में आज 40-42 साल तक, एनएसयूआई में वो उससे पहले से ही थे, वो मान लो 50 साल होते हैं, तो 42 साल तक जिनको हमेशा पदों पर रखा हो, केंद्रीय मंत्री, एआईसीसी का महामंत्री, प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष, चीफ मिनिस्टर जम्मू-कश्मीर का, सबकुछ मिला हो, उनसे कोई देश में उम्मीद ही नहीं करता था कि आजाद साहब इस प्रकार का पत्र लिख देंगे। पहले सोनिया गांधी बीमार थीं, तब पत्र लिखा, तो लोगों ने अन्यथा लिया कि जब हमारी नेता बीमार हैं, भर्ती हैं अस्पताल के अंदर, उस वक्त पत्र क्यों लिखा गया? अब वो जब चेकअप के लिए गई हैं अमेरिका, तो उस वक्त पत्र लिखकर आप क्या संदेश देना चाहते हो अमेरिका के अंदर उनको? ये बड़ी संवेदनशील बात मैं कह रहा हूं, एक हमारी नेता, हमारी महबूब नेता जिसने 20 साल से अधिक समय तक हमारे दबाव के कारण से राजनीति में आई हों, वो राजनीति में आना ही नहीं चाहती थीं, हम सबने दबाव दिया बार-बार कि कांग्रेस बचेगी तो आपके नाम से ही बचेगी, वरना कांग्रेस बिखर जाएगी, ये बात मैं कह रहा हूं 1996 की बात मैं कह रहा हूं, जब सीताराम केसरी जी बने थे अध्यक्ष तब की मैं बात कर रहा हूं, तब भी लोग बिखरने लग गए थे आज ही की तरह, आप बताइए कि उस वक्त से आज तक सोनिया जी ने कांग्रेस को बचाकर रखा, आज वो गई हैं चेकअप के लिए अमेरिका और आप पत्र साझा कर रहे हो, ये मैं समझता हूं कि मानव स्वभाव के खिलाफ है ये, संवेदनशीलता के खिलाफ मैं मानता हूं।

संजय गांधी के दौर में चापलूस माने जाते थे आजाद समेत कई नेता

संजय गांधी के वक्त में चापलूस माने जाते थे ये सब लोग, आज जिनको चापलूस वो कहते हैं दूसरों को, उस वक्त में गुलाम नबी आजाद साहब से लगाकर जो-जो संजय गांधी के साथ थे, वो चापलूस ही माने जाते थे, साइकोफेंट माने जाते थे उस वक्त में, पर संजय गांधी ने परवाह नहीं की, तब जाकर आजाद साहब इतने बड़े नेता बने। अगर संजय गांधी उस वक्त जो कहते थे कि ये चापलूसों से घिरे हुए हैं संजय गांधी, उनको अगर मान लो हटा देते वो, संजय गांधी दबाव में आकर हटा देते, जैसी उम्मीद ये राहुल गांधी से कर रहे हैं, तो आज इस देश के अंदर गुलाम नबी आजाद का नाम, या जो बाकी नेता जो भी हैं, उनका नाम देश में कोई नहीं जानता। हमेशा मैं जब था अध्यक्ष एनएसयूआई का, तो मेरे खिलाफ में भी कई नेता थे 1973-74 के अंदर, अगर मान लो उस वक्त में दबाव में आकर मुझे हटा देते यहां से, मेरे खिलाफ कई बड़े-बड़े नेता थे, नाम नहीं लेना चाहूंगा मैं, अगर हाईकमान दबाव में आकर, मैं एक नौजवान था, 28 साल का था, मुझे हटा देते मान लो दबाव में, तो आज आपके सामने मैं यहां खड़ा नहीं होता। तो ये जो टिप्पणियां की गईं हैं, उचित नहीं कही जा सकती हैं।

संजय गांधी के खिलाफ भी नेता करते थे तीखी टिप्पणी

– वो बच्चे जैसी बातें वाले वो उस वक्त भी बोले जाते थे इनके लिए, उस वक्त में ये आपको हकीकत बता रहा हूं आपको, उस वक्त में भी संजय गांधी के साथ में अगर ये सब लोग थे, हम जैसे लोग खिलाफ भी थे और मेरे जैसे लोग टिप्पणियां अलग-अलग तरह की करते होंगे, कोई इनकी तरह करते होंगे, कोई और ढंग से करते होंगे, पर टिप्पणियां उस वक्त भी होती थीं संजय गांधी के वक्त में, भयंकर होती थीं देश के अंदर, उसके बाद में भी चांस उनको ही मिला जो पक्ष में थे, ज्यादा मिला उन लोगों को चांस, हम जैसे लोगों को मिला जो साथ नहीं थे, ये चलता रहता है। आज उनको लगता है, मैंने तो ये कह दिया न आपको कि जो इन्होंने कहा आज, अभी तो मैं खुद सदमे में हूं कि एक ऐसा 42 साल का जिनको सबकुछ मिला जिंदगी के अंदर, 42 साल भी बिना पद के नहीं रहा हो वो व्यक्ति, आज वो ये मैसेज दे रहे हैं जो मेरी समझ के परे है।

आजाद को कांग्रेस से मिली देश-विदेश में पहचान

 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि, मैं तो यही कह सकता हूं कि गुलाम नबी आआजाद जैसे व्यक्ति को जिनको कांग्रेस ने सबकुछ दिया है। आज पहचान उनकी देश में है तो कांग्रेस के कारण से है, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और सोनिया गांधी के कारण से है। उन्होंने ये जो जिस प्रकार से भावना प्रकट की है, मैं समझता हूं कि उचित नहीं कही जा सकती है, मैं इतना ही कह सकता हूं।

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